न्यायाधीश तरलोक चौहान बने हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश

न्यायाधीश तरलोक चौहान बने हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश

न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी की सेवानिवृत्ति के साथ न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान हाईकोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश बन गए हैं। अब तक के कार्यकाल के दौरान इन्होंने 41,600 मामलों का निपटारा किया। इनमें कई अहम व ऐतिहासिक निर्णय भी सुनाए। मुख्यतया कुल्लू के थलौट हादसे में जनहित याचिका, स्कूलों में शिक्षा सुधार, सरकारी संस्थाओं में ड्रेस कोड व प्रदेश के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की सेवाओं विशेष लाभ देने संबंधी आदेश शामिल हैं।

9 जनवरी, 1964 को रोहड़ू के फरोग गांव में जन्मे न्यायाधीश चौहान की शिमला के बिशप कॉटन स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा हुई। इस दौरान स्कूल के कैप्टन भी रहे। डीएवी कॉलेज चंडीगढ़ से ऑनर्स के साथ स्नातक, पंजाब विवि चंडीगढ़ से कानून की डिग्री लेने के बाद वर्ष 1989 में वकील बने व लाला छबील दास वरिष्ठ अधिवक्ता के चैंबर में शामिल हुए। प्रदेश हाईकोर्ट में वकालत शुरू करते हुए कानून के सभी क्षेत्रों में महारत हासिल की।

राज्य विद्युत बोर्ड लिमिटेड व राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अलावा कई बोर्डों, निगमों, वित्तीय संस्थानों, सार्वजनिक और निजी कंपनियों, शैक्षिक संस्थानों और सहकारी समितियों व विभिन्न विभागों के कानूनी सलाहकार रहे। विभिन्न लोक अदालतों के सदस्य बने।
हाइडल प्रोजेक्ट्स, रोप-वे, पर्यावरण कानूनों के उल्लंघन, प्लास्टिक और तंबाकू उत्पादों पर प्रतिबंध, सॉलिड वेस्ट प्रबंधन परियोजनाओं के कार्यान्वयन और प्रदेश में सड़क निर्माण नीति के निर्धारण से संबंधित कई महत्वपूर्ण मामलों में सहयोग के लिए हाईकोर्ट द्वारा कोर्ट मित्र नियुक्त किए गए। तरलोक सिंह चौहान 23 फरवरी 2014 को हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश के बाद 30 नवंबर 2014 को हाईकोर्ट के स्थायी न्यायाधीश बनाए गए।

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