मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा  पंचायत प्रधानों के खिलाफ गड़बड़ी पाई गई तो विजिलेंस जांच होगी,और क्या कहा सुनिएके

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा पंचायत प्रधानों के खिलाफ गड़बड़ी पाई गई तो विजिलेंस जांच होगी,और क्या कहा सुनिएके

प्रदेश मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने विधानसभा नें उठे सवाल के जबाब में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ये बात कही की प्रदेश भर में पंचायतों में प्रधान अच्छा काम भी कर रहे हैं लेकिन कुछ पंचायतों से शिकायते आती है लेकिन अगर प्रधानों के खिलाफ आ गड़बड़ी पाई गई तो विजिलेंस जाँच होगी

हिमाचल सरकार पंचायतों के विकास कार्यों में हुई गड़बड़ी की विजिलेंस जांच करवाएगी। विधायक हर्षवर्धन चौहान और राकेश पठानिया के सवाल पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने जांच के निर्देश देते हुए कहा कि गंभीर शिकायतों की विजिलेंस से तीन माह में जांच पूरी करवाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह मामला चिंतनीय है। उन्होंने सत्ता और विपक्ष के विधायकों को हिदायत देते हुए कहा कि जांच में दोषी पाए जाने वाले जन प्रतिनिधियों सहित सरकारी कर्मियों को बचाने की मांग को लेकर कोई भी उनके पास ना आए। उधर, पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि शिलाई ब्लॉक की सभी पंचायतों की छह माह के भीतर जांच करवाई जाएगी।
मंगलवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान शिलाई से कांग्रेस विधायक हर्षवर्धन चौहान ने मामला उठाते हुए कहा कि शिलाई में भ्रष्टाचार का स्तर बहुत अधिक हो गया है। बीडीओ द्वारा विकास कार्यों में मनमानी की जा रही है। इस भ्रष्टाचार को रोकने में मैं विफल रहा हूं। पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार शिलाई ब्लॉक में हो रहा है। बांदली पंचायत के तहत एक स्कूल पर पांच लाख का खर्च बताया गया, जबकि प्रिंसिपल ने बताया कि वहां तो काम ही नहीं हुआ है। विधायक ने कहा कि उनके ब्लॉक में बीते कुछ सालों के दौरान स्वीकृत हुए 500 करोड़ में से करीब 300 करोड़ का घोटाला हुआ है।
ब्लॉक और जिला के अफसरों की मिलीभगत से घोटाले को अंजाम दिया गया। सचिवालय के कुछ अफसरों की भी इसमें संलिप्तता है। विधायक राकेश पठानिया ने कहा कि पंचायत के कामकाज पर हम नजर नहीं रख पा रहे हैं। सरकारी धनराशि का दुरुपयोग हो रहा है। विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने भी अनियमितताओं का मामला उठाया। अधिकांश विधायकों ने बीडीओ, प्रधान, सचिव, तकनीकी सहायक, जेई की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
विधायक के सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वित्त आयोग की ग्रांट अब सीधे पंचायतों में जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक अच्छी मंशा के तहत यह प्रावधान किया, लेकिन इसका प्रयोग सही नहीं हो रहा है। इसको लेकर अब सख्ती बरती जाएगी। गंभीर शिकायतों की सरकार विजिलेंस से जांच करवाएगी। उधर, पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर ने बताया कि विकास कार्यों की जांच के लिए तकनीकी विंग भी बनाया जा रहा है।

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