हिमाचल :राम सुभाग सिंह होंगे चीफ सेक्रेटरी, अनिल खाची बनेंगे प्रदेश चुनाव आयुक्त

हिमाचल :राम सुभाग सिंह होंगे चीफ सेक्रेटरी, अनिल खाची बनेंगे प्रदेश चुनाव आयुक्त

शिमला।। 1987 बैच के आईएएस अधिकारी राम सुभाग सिंह को हिमाचल प्रदेश सरकार नया मुख्य सचिव बनाने जा रही है। वहीं मौजूदा मुख्य सचिव अनिल खाची को राज्य का चुनाव आयुक्त लगाने की तैयारी है। पिछले लगभग छह महीनों से ऐसी अटकलें थीं कि मुख्य सचिव को बदला जा सकता है। मगर अब जाकर यह परिवर्तन होता दिख रहा है।

इस संबंध में कार्मिक विभाग की ओर से फाइल्स राजभवन भेजी गई थीं जो देर रात को मंजूर हो गईं। उम्मीद की जा रही थी कि इस संबंध में देर रात को ही अधिसूचना जारी कर दी जाएगी मगर ऐसा हुआ नहीं। अब गुरुवार को सुबह किसी भी वक्त अधिसूचना जारी हो सकती है।

1987 बैच के आईएएस अधिकारी राम सुभाग सिंह के लिए कई राजनेता, अधिकारी और पत्रकार ‘आरएसएस’ नाम इस्तेमाल करते हैं। अभी तक वह अतिरिक्त मुख्य हैं। पिछले कई महीनों से ऐसी जानकारियां सामने आ रही थीं कि ढीली पड़ी अफसरशाही पर लगाम लगाने के लिए सरकार मुख्य सचिव को बदल सकती है। नए मुख्य सचिव के लिए राम सुभाग के नाम पर चर्चा तो हो रही थी मगर चर्चाओं का यह दौर लंबा खिंच गया था। अब अचानक लिए गए इस फैसले ने सबको चौंका दिया है।
दरअसल मौजूदा सरकार का कार्यकाल खत्म होने में डेढ़ साल से भी कम समय बचा है। इससे पहले के कार्यकाल के दौरान कई मुख्य सचिव बदल गए जिससे सरकार को काम करने में दिक्कतें हुईं। जयराम सरकार के कार्यकाल की शुरुआत में मुख्य सचिव वीसी फारका थे। फिर सरकार ने उनकी जगह विनीत चौधरी को मुख्य सचिव बनाया जो जे.पी. नड्डा के करीबी माने जाते हैं।
उनके रिटायर होने के बाद बी.के. अग्रवाल मुख्य सचिव बनाए गए जो पहले केंद्र की प्रतिनियुक्ति पर थे। फिर वे दोबारा सेंट्रल डेप्युटेशन पर चले गए। फिर श्रीकांत बाल्दी मुख्य सचिव बने जो 31 दिसंबर 2019 को रिटायर हो गए। उसके बाद 1 जनवरी 2020 को अनिल खाची मुख्य सचिव बने जो 1986 बैच के अधिकारी हैं।

मुख्य सचिव प्रदेश का सबसे बड़ा नौकरशाह होता है और सरकार के फैसलों और योजनाओं को जमीन पर लागू करवाने वाले अधिकारियों का मुखिया होता है। ऐसे में सरकार का इरादा है कि आखिर के बचे कुछ महीनों में काम में तेजी लाई जाए। इसी इरादे से राम सुभाग सिंह को मुख्य सचिव बनाया जा रहा है।

अनिल खाची को मुख्य सचिव पद से हटाकर चुनाव आयुक्त के पद पर भेजे जाने को लेकर सरकार के जुड़े सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों तक में इस बात को लेकर नाराजगी देखी जा रही थी कि कोरोना काल के दौरान सरकारी योजनाओं और फैसलों को धरातल पर उस तरह से नहीं उतारा गया, जिस तरह से उतारा जाना चाहिए था। हाल में एक बैठक के दौरान मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर और अनिल खाची के बीच तनातनी की खबरें भी सामने आई थीं। इस बीच अनिल खाची राज्य चुनाव आयुक्त पद पर क़रीब डेढ़ साल रहेंगे, उसके बाद उनकी सेवानिवृति होनी है।

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