हेलीकॉप्टर किराए पर लेने के मामले पर मुख्यमंत्री  के समर्थन में कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह,  कांग्रेस हुई दोफाड़

हेलीकॉप्टर किराए पर लेने के मामले पर मुख्यमंत्री के समर्थन में कांग्रेस विधायक विक्रमादित्य सिंह, कांग्रेस हुई दोफाड़

पिछले काफ़ी समय से मुख्यमंत्री के उड़नखटोले के ऊपर विवाद चला हुआ है, जैसा आप जानते हैं हमने हमेशा सही को सही और ग़लत को ग़लत कहने में विश्वास रखा हैं।

हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा 5 लाख 10 हजार रुपये प्रति घँटे के हिसाब से किराये पर रशियन कम्पनी का हेलीकॉप्टर लेने पर प्रदेश में राजनीतिक गलियारों में हंगामा हो गया कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कुलदीप राठौर व नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने विरोध किया लेकिन कांग्रेस के युवा विधायक विक्रमादित्य सिंह मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के समर्थन में आ गए उन्होंने कहा कि जहाँ तक इस हेलीकॉप्टर की बात है हमें लगता है कि बेशक़ यह महँगा ज़रूर हैं(जो हमें विश्वास हैं ग्लोबल टेंडर से शॉर्ट लिस्ट हुआ हैं) और इससे सरकार द्वारा ख़रीदने पर विचार किया जाना चाहिए मगर यह 18 सीटर विमान प्रदेश हित में है, हमें याद रखना चाहिए कि यह हेलीकॉप्टर केवल मुख्यमंत्री के लिए नहीं अपितु दुर्गम क्षेत्र में फँसे लोगों को शिमला आदि और शहरों में लाने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है।

हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में लाहौल स्पीति ,पांगी भरमौर, डोडरा क्वाँर जैसे दुर्गम क्षेत्र में फँसे लोगों को लाने के लिए यह हेलीकॉप्टर बहुत आवश्यक है, जिसका उदाहरण कई बार हमने पूर्व में देखा हैं।

हिमाचल ही नहीं हर राज्य के पास अपना विमान है, और जहाँ मुख्यमंत्री इसका इस्तेमाल अपने सरकारी कार्यों के लिए करते हैं वहीं आपातकाल की परिस्थिति मैं इस विमान का इस्तेमाल प्रदेश के और लोगों के लिए पूर्व की तरह भविष्य में भी होना चाहिए।

बहुत से अन्य मसलें हैं जिस पर सरकार को घेरा जा सकता हैं,
परंतु यह उन में से नहीं हैं, इस महामारी के समय में इस हेलीकॉप्टर कि प्रदेश को पहले से ज़्यादा आवश्यकता है , भगवान न करे नासिक जैसी कोई घटना हिमाचल में हो जाएं और मरीज़ों को “एयर लिफ़्ट” करना पड़े या ऑक्सीजन सप्लाई दुर्गम क्षेत्रों में पहुँचानी पड़े तो सरकार किसके पास हाथ फैलाती रहें ?

अगर किसी को हमारे विचार बुरे लगें,
तों हम उसके लिए क्षमाप्रार्थी है,
परंतु हम हमेशा तथ्य और तर्क के साथ,
अपने विचार रखते रहेंगे।

कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने आरोप लगाया कि प्रदेश पहले ही कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है और कोविड-19 में सरकार का खजाना भी खाली हो गया है और सरकार को कर्मचारियों के वेतन और भत्तों में कटौती करनी पड़ रही है लेकिन इस पैसे से सरकार अय्याशी करने में लगी है सरकार ने मुख्यमंत्री के लिए 5 लाख प्रतिदिन के हिसाब से नया हेलीकॉप्टर लीज पर लिया है जबकि इस संकट काल में नए हेलीकॉप्टर को लीज पर लेने का सवाल पैदा नहीं होता था उन्होंने शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज के आरोपों पर भी पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस के नेता हिमाचल में विकास करवाया है और वह घोड़ों पर भी गए हैं और आज हिमाचल को इस मुकाम तक पहुंचा दिया है कि मुख्यमंत्री हेलीकॉप्टर में घूम सकते हैं।
प्रतिपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने संसदीय कार्यमंत्री पर पलट वार करते हुए कहा कि हिमाचल सरकार को हेलिकॉप्टर सौदा सालाना 35 करोड़ में पड़ेगा। उन्होंने कहाकि सरकार कम्पनी से हुए करार के दस्तावेज पुराने करारों सहित सार्वजनिक करे। साथ में कम्पनी को लगाए गए 5 करोड़ जुर्माने के काग़ज़ात भी दिखाए, क्यूँकि जुर्माना लगाने की दावा उन्होंने किया है।उन्होंने कहा नए हेलीकाप्टर ख़रीद की टाइमिंग पर हिमाचल में ही नही पूरे देश में प्रतिक्रिया हुई है कि ऐसा कौन सा प्रदेश है जो कोविड काल में हेलीकाप्टर ख़रीद रहा है और यह प्रतिक्रिया स्वाभाविक भी है। मुकेश अग्निहोत्री ने कहाकि लोकतंत्र लोकलज्य से चलता है। आज जब भारद्वाज हेलीकाप्टर ख़रीद पर सफ़ाई दे रहे हैं उस दिन भारत ने कोरोना में विश्व रिकोर्ड बनाया है। हिमाचल मंत्रिमंडल में सभी कर्मचारियों की दो – दो रोज़ की तनख़्वाह काट रहे हो., चतुर्थ श्रेणी को भी नही छोड़ा। प्रदेश में हाथ फैलाए हुए हो। अगर कोरोना काल में छोटा हेलिकॉप्टर ही चलाए रखते तो क्या दिक़्क़त थी। उन्होंने पूर्व मुख्य मंत्री के समय खच्चर , गधे पर चलने जेसी शब्दाबली पर एतराज जताया और कहा कि इस शासन में में भी हेलीकाप्टर का इस्तेमाल कहाँ कहाँ हुआ है, सब मालूम है यह मत समझो कि इसबारे किसी को कोई खबर नही। प्रतिपक्ष के नेता ने कहाकि क़र्ज़े के रिकोर्ड टूट गए, क़र्ज़े लेने की सीमाएँ बढ़ाई जा रही है, एक इंच भी सरकार बिना हेलीकाप्टर के नही चलती, अन्दाज़ शाही हैं कि रशिया से मंगाए चमचमाते हेलीकाप्टर की ही सवारी करनी है।इस समय बेक्सिन एवं ऑक्सिजन ज़रूरी है ना की हवाई सर्वे। उन्होंने कहा कि ट्राइबल इलाक़ों का तो महज़ नाम है। उन्हें कितनी बार हेलीकाप्टर भेजा गया। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि पवन हंस सरकारी कम्पनी थी 2012 में तत्कालीन धूमल सरकार ने तीन लाख 36 हज़ार प्रति घंटे के हिसाब से हेलीकाप्टर लिया , जबकि 2017 में उसे दो साल के लिए तीन लाख तीस हज़ार पर कार हुआ था। जबकि अब पाँच लाख दस हज़ार पर करार किया है।

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