मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खु ने धर्मशाला में विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

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सरकार की कल्याणकारी योजनओं के बारे लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने आज धर्मशाला में दूसरे दिन विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ मैराथन बैठकों की अध्यक्षता की और कांगड़ा जिला में विभिन्न विकासात्मक योजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के बारे में समुचित प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए ताकि इन योजनओं से लोगों को लाभ मिल सके।
उन्होंने कहा कि जो राशि विभिन्न कार्यों के लिए आवंटित की गई थी लेकिन समयबद्ध व्यय नहीं की गई उसे वापिस उपायुक्त को भेजा जाए या स्थानीय विधायक की संस्तुति पर राशि का डायवर्जन भी किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार समाज के सभी वर्गों के लिए विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं तैयार कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष हरित बजट पेश किया है, जिसके तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र की दो पंचायतों में दो मेगावाट क्षमता की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जाएंगी और कांगड़ा जिले के सभी 15 विधानसभा क्षेत्रों में दो-दो पंचायतों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने इसके दृष्टिगत स्थल चयन का कार्य अतिशीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने इस वर्ष 500 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है। राज्य सरकार ने 250 किलोवाट से 2 मेगावाट तक की सौर ऊर्जा परियोजनाओं की स्थापना के लिए 40 प्रतिशत उपदान प्रदान करने के लिए राजीव गांधी स्वरोजगार योजना शुरू करने की मंजूरी दे दी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बजट में मनरेगा की दिहाड़ी में 28 रुपये की बढ़ौतरी कर इसे 240 रुपये किया गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में इस योजना से अर्थव्यवस्था को बल मिला और लोगों को घर-द्वार पर रोजगार भी उपलब्ध हुआ।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने विधवाओं और एकल महिलाओं को घर बनाने के लिए 1.5 लाख रुपये का प्रावधान किया है। इस वर्ष इस योजना के तहत 7000 महिलाओं को लाभान्वित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। साथ ही, इस योजना के तहत बनने वाले घरों में बिजली पानी जैसी समुचित सुविधा भी मुहैया कराई जाएगी। इसके अलावा, 6000 अनाथ बच्चों को चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट के रूप में गोद लिया गया है, जिसके तहत राज्य सरकार उन्हें घर बनाने के साथ-साथ उनकी शिक्षा का पूरा खर्च वहन करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिम उन्नति योजना शुरू करने जा रही है, जिसके लिए बुनियादी ढांचे का विकास किया जा रहा है। लोगों से गाय का दूध 80 रुपये प्रति लीटर और भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जाएगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने बजट में इन्दिरा गांधी महिला सम्मान निधि योजना के तहत प्रथम चरण में 18 वर्ष से अधिक आयु की 2.31 लाख महिलाओं को 1500 प्रतिमाह चरणबद्ध तरीके से पेंशन प्रदान करने का प्रावधान किया है। राज्य की सभी पात्र महिलाओं को इस योजना के अंतर्गत शामिल किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कुपोषित बच्चों के विकास के हर पहलू का अध्ययन कर मानक संचालन प्रक्रिया तैयार कर पूरे प्रदेश में लागू की जाएगी। कुपोषित बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार करना आवश्यक है, जिसके लिए निगरानी प्रणाली विकसित की जाएगी और 15 वर्ष की आयु तक उनकी देखभाल की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 20 हजार मेधावी छात्राओं को ई-स्कूटी खरीदने के लिए 25 हजार रुपये का उपदान प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ भू-जोत अधिकतम सीमा अधिनियम में संशोधन कर बेटियों को बेटों की तरह अलग ईकाई के रूप मंे सम्मिलित किया जाता था। इससे पूर्व परिवार में केवल बेटों को अलग ईकाई के रूप मंे शामिल किया जाएगा जबकि बेटियां इस अधिकार से वंचित थी। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश सरकार का एक ऐतिहासिक निर्णय है।
उन्होंने जसवां परागपुर संसदीय क्षेत्र में उपमंडलाधिकारी कार्यालय खोलने के लिए उपयुक्त स्थान चिहिन्त करने के निर्देश दिए। विधायकों ने भी बैठकों के दौरान अपने बहुमूल्य सुझाव दिए।
इस अवसर पर मुख्य संसदीय सचिव किशोरी लाल, विधायक संजय रत्न, भवानी सिंह पठानिया, केवल सिंह पठानिया, मलेन्द्र राजन, हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष आर.एस.बाली, कृषि विकास बैंक के अध्यक्ष संजय चौहान, हिमाचल प्रदेश औद्योगिक विकास निगम के उपाध्यक्ष विशाल चम्बियाल, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस समिति के कोषाध्यक्ष डॉ. राजेश शर्मा, जिला कांग्रेस समिति के अध्यक्ष अजय महाजन, उपायुक्त डॉ. निपुण जिंदल तथा विभिन्न विभागों के अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे।
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